जिला -महासमुंद
विषय-खिलौना
विधा- छंद मुक्त कविता
शीर्षक- खिलौनेवाला
★★★★★★★★★★★★★★
, खिलौनेवाला
खिलौने वाले के झोले मे होते नित।
नए खिलौने जो लेते बच्चों का मन जीत ।।
जैसे खिलौने वाला खिलौने लाता है ।
बच्चे के चेहरे पर ख़ुशी छा जाता है।।
सारे खिलौने खरीद दे मइया यही भाव आता है।
यही सोच बच्चों के मुख पर खुशी छा जाता है।।
खिलौने से खेले हम खेल सारा।
हमें खिलौना है सबसे प्यारा ।।
खेल खेले बच्चे सारे।
खिलौने उनके रंगबिंरगे होते सारे।।
घोड़े, चिड़िया,हाथी,मोटू,छोटू बंदर ।
देख उनकी मुस्कुराहट होते अतिसुंदर ।।
जैसे खिलौने वाला आता है ।
बच्चों के चेहरे पर ख़ुशी छा जाता है।।
फूलों सी मुस्कान हो जाती है।
खिलौने जब बच्चों को मिल जाती है ।।
सभी ने लिये पसंद के अपने-अपने।
अब सच हो गए खिलौने के सपने ।।
खिलौने वाले भी खुश हो जाते है ।
खिलौना पाकर जब बच्चे खिलखलाते है ।।
रचनाकार _ प्रेमचंद साव 'प्रेम'
बसना
No comments:
Post a Comment