स्थान- मनेंद्रगढ़
जिला- कोरिया
शीर्षक-खिलौना
विधा - बाल कविता
गुड्डे गुड़िया हाथी घोड़ा
बंदर भालू तोता मैना
एक से बढ़कर एक है बहना
आओ तुमको दिखाता हूं खिलौना
ये देखो हाथी की शान
लंबी सूंड ,बड़े हैं कान
घोड़ा अपना दमदार है
दौड़ता तेज रफ़्तार है।
बंदर की है बात निराली
नकल करता सबकी,
बजाता ताली
वो देखो पीछे बैठी मैना
सोच रही अब किधर है उड़ना
हरे तोते का है चोंच लाल
मिट्ठू मिट्ठू करता रट्टूलाल
भालू भी है खूब मतवाला
भारी भरकम शरीर वाला
अब बारी है खरगोश का
छोटा सा है ,सफ़ेद रंग जिसका
गाजर यह खाता है
बहुत तेज़ भागता है।
मगर,हिरण सब देख रहे थे
मेरा नंबर कब आएगा
ये सोच रहे थे
जब तक गुड्डे - गुड़िया
भी सज गए
खिलौने देखकर
बच्चे बहुत खुश हुए।
खिलौने देखकर
बच्चे बहुत खुश हुए।
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