जिला - बलौदा बाजार (छ. ग.)
विषय - पूर्वाग्रह
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - पूर्वाग्रह में मत फँसो
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// पूर्वाग्रह में मत फँसो //
पूर्वाग्रह से ग्रसित धारणा ,
हमेशा सत्य नही होते ।
उल्टे - सीधे गलत विचार ,
लोग भ्रमित हो जाते ।।
सुनी - सुनाई मनगढ़ंत ,
बेसिर पैर की बातें ।
जिनका कोई प्रमाण नही ,
पूर्वाग्रही सबको बताते ।।
पहले से जब निश्चित है ,
औरों के प्रति अभिमत ।
बिना लगाए बुद्धि विवेक ,
हो जाते हैं सहमत ।।
पूर्वाग्रह का दुष्प्रभाव ,
आज भी व्यापित है सर्वत्र ।
लोग भले ही शिक्षित हैं ,
अफवाहों से होते ग्रस्त ।।
सच्चे साधु - संतों को ,
कहते ढोंगी बाबा ।
वेद पुराण धर्म ग्रंथों को ,
बताते काल्पनिक गाथा ।।
संस्कृति और इतिहास भी ,
मानो गड़रिये का है गीत ।
इसीलिए भारत के प्रति ,
पूर्वाग्रही की झूठी प्रीत ।।
वस्तु व्यक्ति परिस्थिति ,
या कोई पार्टी संगठन ।
पूर्वाग्रहों के शिकार होते ,
विकृत मान्यताओं का बंधन ।।
पूर्वाग्रह से मुक्त समाज ,
खुली हवा में जीता है ।
वैज्ञानिक बुद्धि से वह ,
पानी छानकर पीता है ।।
पूर्वाग्रह की बीमारी ,
खतरनाक होती है ।
अच्छे बुरे का भेद नहीं ,
अज्ञानता दर्शाती है ।।
पूर्वाग्रह में मत फँसो ,
व्यवहारिक ज्ञान बढ़ाओ ।
बिना सोचे समझे कभी ,
किसी के झाँसे में न आओ ।।
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