जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-पूर्वाग्रह
विधा-कविता (मुक्त छंद)
पूर्वाग्रह से ग्रसित न हों,
विकृत न करें विचार ।
परिवर्तन है तो जीवन है,
यही है जीवन सार।
हमेशा ही सच नहीं होते,
देखे गये हर सपने ।
नवीन विचार नवीनता,
सबको लगते प्यारे ।
आकाक्षाओं की डगर में,
सब ऊंचे लांघ जाते ।
आओ पूर्वाग्रह से बचें हम ,
नई राह पर चलें हम ।।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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