Monday, February 15, 2021

लीलाधर कुम्हार की रचना- बसंत पंचमी

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग. )
विषय - बसंत पंचमी
विधा - मुक्त छंद
शीर्षक - बसंत पंचमी
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       // बसंत पंचमी //

सरस्वती माँ का जन्मोत्सव ।
आया बसंत पंचमी महोत्सव ।।
बसंत ऋतु की शुरुवात है ।
नव परिवर्तन का प्रभात है ।।
विद्यादायिनी शारद मैया ।
पार करे वो सबकी नैया ।।
करते हर कोई पूजा वंदन ।
मंगल आशीष पाते सभी जन ।।
कवि लेखक वैज्ञानिक डॉक्टर ।
विद्यार्थी भी माँ के भक्तवर ।।
खर्च करो तो बढ़ती जाए ।
नहीं तो ज्ञान लुप्त हो जाये ।।
विनम्रता सज्जनता लाती ।
माँ की विद्या सबको भाती ।।
ऋतुराज का पावन शुभ दिन ।
प्रकृति का श्रृंगार है अनगिन ।।
नव पल्लव फल फूल मनोहर ।
बौर आम का मादक सुंदर ।।
खेत बाग जंगल में मंगल ।
सृष्टि में मनभावन हलचल ।।
बसंतोत्सव के विविध रंग ।
बसंत पंचमी की यही उमंग ।।

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