संबलपुर,जिला-कांकेर, (छ .ग.)
विषय-परजीवी,दिनाँक-16.02.21
*परजीवी*
परजीवी अर्थात जो जीव किसी दूसरे जीव के ऊपर भोजन और आवास के लिए आश्रित होता है,वो जीव परजीवी कहलाते हैं ।जैसे- जोंक,अमीबा आदि।
परजीवी प्रकृति में सहज ढंग से रहने वाले स्वभाविक सहवास है ,जिसके द्वारा एक जीव दूसरे के साथ परपोषी का संबंध रख अपनी भोजन की व्यवस्था करता है, और उसे कुछ नुकसान भी नहीं पहूँचाता ।जैसे मुलोस्का समूह के जंतु कवचों पर दूसरे जंतु रहते हैं ।ये साथ- साथ रहते हुए अतिथि और परपोषी एक दूसरे से लाभ प्राप्त करते हैं ।
परजीवो में जुएं चिलुआ और किलनी होते हैं ।कुछ कीट दूसरे कीटों को खाते नहीं ,मगर उनके द्वारा एकत्रित भोज्य पदार्थों को खा जाते हैं ।यह सामाजिक कीटों के घोंसलों में अधिक पाया जाता है ।उदाहरण स्वरूप मोम का शलभ है, जो मधुमक्खियों के छत्तों में रहता है,और छत्तों को नष्ट कर देता है ।वोल्युसिला नामक मधुमक्खी भिन-भिन करने वाली मक्खियों और बर्रों के छत्ते में रहकर उच्छिष्ट कार्बनिक पदार्थों को खाती है। ऐटेल्युरा नामक कीट चींटियों के बिल में रहकर जब एक चींटी दूसरी चींटी को अपना उल्टी किया हुआ भोजन देती है, तब उसको पी लेता है ।कुछ कीट अपने पोषकों को लाभ पहूँचाते हैं।
मानव शरीर को नुकसान पहूँचाने वाले पर जीवों का संक्रमण गंदे पानी में उगाई गई सब्जी और फलों और अधपका मांस से भी हो सकता है ।यह परजीवी गंदे पानी में अंडे देते हैं। उस पानी को यदि कोई सेवन कर लेता है, तो यह शरीर के अंदर पहुँच कर बढ़ने लगता है। खान-पान में सावधानी बरतने से इस संक्रमण से बचा जा सकता है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर, (छ. ग.)
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