स्थान --नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला-- जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा--- कविता /आलेख
विषय-- बसंत पंचमी
शीर्षक-- गीत बसंती
गीत बसंती गाने से, खुशियां मन में भर जाता ।
धरती के सभी प्राणी,खुश हो उसके गीत गाता ।
शीत ऋतु के अन्त से, होता बसंत का शुभागमन ।
ऋतुओं में सबसे सुखदाई, सुख से भर देता जीवन ।
इसलिए ऋतुओं का राजा, इस जग में वह कहलाता ।
आम का बौर इस बेला में,पलाश भी खिल उठते ।
खेतों में गेहूं की बाली, पीले सरसों मचल उठते।
महुआ की डाल मादक भरे, सबका मन ललचाता ।
नदी तालाब वन पर्वत, हलचल मेघ गगन उड़ाता ।
कहीं कहीं बारिश की बूंदें, धरती को है नहलाता ।
गीली मिट्टी सोंधी खुशबू, आकर पवन बहाता ।
भौंरा बागों में खुश दिखता, फूल फूल का रस लेता ।
कोयल की मीठी ताने,अमराई में खूब सुनाई देता ।
सब कहते उसे गीत की रानी, सभी राग दुहराता ।
मानव मन भी प्रफुल्लित, उसके आगमन से होते ।
बसंत बहार सबका आधार, हंसते हंसते जीवन ढ़ोते ।
जो बसंत में बसंत न जाना, उससे अपना नहीं नाता ।
No comments:
Post a Comment