Tuesday, February 23, 2021

विनोद कुमार "जोगी" की रचना- तरकीब

रचनाकार :- विनोद कुमार "जोगी"
जिला :- महासमुंद
विषय :- तरकीब
विधा :- छंद मुक्त कविता
शीर्षक :- ऐसी तरकीब खोजनी है।

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ज़िन्दगी बेतरतीब हो गई है,
हमें तरतीब खोजनी है।
सजा सके उसे सलीके से,
ऐसी तरकीब खोजनी है।

हाथों की लकीरों से जोगी,
कभी तकदीर नहीं बनती।
कर्म से बदल जाए ज़िन्दगी अपनी,
ऐसी तकदीर खोजनी है।

दुख के पल तोड़ते हैं हमें,
खुशी के लम्हें खुशियां देती है।
कैद हो जिसमें हर खुशी हमारी,
ऐसी तस्वीर खोजनी है।

कि मिलता नहीं है जोगी,
जग के हर दर पे आसरा।
बिता सकें जहां सुकून के कुछ पल,
ऐसी दहलीज़ खोजनी है।

ज़िन्दगी बेतरतीब हो गई है,
हमें तरतीब खोजनी है।
सजा सके उसे सलीके से,
ऐसी तरकीब खोजनी है।

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