जिला - बलौदाबाजार (छत्तीसगढ़)
विषय - खिलौना
विधा - मुक्त छंद
शीर्षक - प्रभु का खिलौना
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// प्रभु का खिलौना //
प्रभु का मैं खिलौना हूँ ,
प्रभु मेरे सूत्रधार ।
प्रभु इच्छा से खेलता ,
मैं सतत विविध प्रकार ।।
दुनिया के रंगमंच पर ,
नाच गान और नाटक खेल ।
करता हूँ अभिनय अपना ,
छुक - छुक भागे जीवन रेल ।।
करते और कराते प्रभु जी ,
आदेश उनका सिर माथे पर ।
प्रभु का सिक्का सर्वत्र चले ,
मैं प्रभु का गुलाम अनुचर ।।
प्रभु के हाथों में रिमोट ,
ऐसा गजब खिलौना हूँ ,
जो चाहे वह खेल करा ले ,
मैं तो नन्हा बौना हूँ ।।
मेरे बस में कुछ नहीं ,
प्रभु की सत्ता सर्वोपरि ।
तन मन प्राण प्रभु की देन ,
सदा समर्पित मैं हर घड़ी ।।
मारे तारे भूखा राखे ,
मेरे प्रभु की मर्जी ।
मुझको सब स्वीकार है ,
इस खिलौने की अर्जी ।।
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