जिला- कोरबा, छ.ग.
विषय-खोज
विधा- आलेख
शीर्षक- आनंद की खोज
--------प्रत्येक मनुष्य की यही खोज ह़ोती है कि जिंदगी में आनंद. चाहिए , खुशहाली चाहिए ।
और जिंदगी में आनंद लाने के.लिए हमें प्रयत्न करना पड़ेगा, प्रयत्नशील रहना पड़ेगा। प्रश्न ये उठता है कि कैसा प्रयत्न करें ? साधारण सी बात है कि नैतिक बनेंगे, सच्चरित्र बनेंगे तो समाज में मान प्रतिष्ठा बढेगा और हम सामाजिक खुशहाली महसूस करेंगे ।
और शिक्षित बनेंगे उद्योग, उद्म करेंगे तो आर्थिक संपन्नता आएगी तब हमें अर्थ की खुशहाली पाएंगे ।
फिर हम क्रमशः भगवान की भक्ति करेंगे निष्काम भक्ति तब हम उस ईश्वर का सामिप्य महसूस करेंगे जो आनंद के सागर हैं । फिर हमें जीवन में आनंद आएगा और हम भव सागर में रहते हुए निर्वाण प्राप्त करेंगे। हमें सदैव इसी अनुसंधान में रहना चाहिए।यही इस संसार का वास्तविक खोज है
यही इस संसार का सत्य है ।
।।इति।।
" गोमती सिंह"
कोरबा, छ. ग.
बहुत सुंदर लेख, सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक विकास हीसच्चे आनंद की अनुभूति हो सकती है। यही मनुष्यता का परिचायक है।
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