स्थान - मनेंद्रगढ़
शीर्षक - मुस्कान
विधा - कविता
पुलकित नयन,प्रफुल्लित हो मन
लालिमा छा जाती है चेहरे पर
जब अधरों पर मुस्कान आती है।
दर्शन हो तुम्हारा प्रिय
हर्षित हो जाता मेरा हृदय
याद करके बीते लम्हों को
बावरा मन खुश हो जाता है
तब अधरों पर मुस्कान
आ जाती है।
क्षणिक सुख है ये जो कुछ
देर के लिए चेहरे पर आ जाती है।
फिर भी मानव मन खुश हो जाता है
जब अधरो पर मुस्कान आती है।
किंतु सबसे अनमोल मुस्कान
तो वो है जो किसी के
मुस्कुराने की वजह बन जाए
कभी किसी के दर्द की दवा
बन जाए।
तब अधरो पर जो मुस्कुराहट आएगी वो अंतरात्मा तक छा जाएगी और गहरी हो जाएगी
उन यादों की तरह जो मानस पटल पर विदमान हो जाती है।
तब अधरों पर सुकून वाली मुस्कान आती है ।
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