Tuesday, February 9, 2021

द्रोपती साहू "सरसिज" की रचना- बसंत

द्रोपती साहू "सरसिज"
महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक-"आया-मधुमास"
विषय-बसंत
विधा-कविता(तुकांत)
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वसुधा पर उस स्वर्ग सा ,
         उर उल्लास भरे मधुमास। 
सरसों की पीली छटा देख , 
         मन मगन हुए धरे उल्लास ।।

बौर अमुआ का बना राजा , 
       रानी हुई खिले सुर्ख पलास । 
मधुर तान भर कोयलिया , 
       देती है जीवन की आस ।। 

नभ निर्मल दिक् स्वच्छ हुआ , 
       हवा में शीतल मंद सुबास ।
उस परमेश्वरी का जन्म हुआ , 
       मानव का पूर्ण हुआ उपवास ।। 

सजे बाग-बगीचे मधुबन , 
     भ्रमरों के गुँजन का अहसास । 
नाचे धरा और झूमे गगन , 
     आया  जब  माही  मधुमास ।। 
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