महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक-"आया-मधुमास"
विषय-बसंत
विधा-कविता(तुकांत)
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वसुधा पर उस स्वर्ग सा ,
उर उल्लास भरे मधुमास।
सरसों की पीली छटा देख ,
मन मगन हुए धरे उल्लास ।।
बौर अमुआ का बना राजा ,
रानी हुई खिले सुर्ख पलास ।
मधुर तान भर कोयलिया ,
देती है जीवन की आस ।।
नभ निर्मल दिक् स्वच्छ हुआ ,
हवा में शीतल मंद सुबास ।
उस परमेश्वरी का जन्म हुआ ,
मानव का पूर्ण हुआ उपवास ।।
सजे बाग-बगीचे मधुबन ,
भ्रमरों के गुँजन का अहसास ।
नाचे धरा और झूमे गगन ,
आया जब माही मधुमास ।।
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