स्थान ---नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा/छत्तीसगढ़
विधा ---कविता
शीर्षक--- नमन
उन कविताओं को शत् शत् नमन, जिनमें लोक कल्याण बसते है ।
उन कवियों को शत शत नमन मेरा,जो दिन रात ऐसे रचना रचते हैं ।
गांव शहर नगर खेत खलिहान, अन्न धन जीवन का करते बखान ।
बसते जहां साधु असाधू सज्जन दुर्जन निर्बल सबल एक दिन होते महान ।
जिनका जीवन गंगा यमुना की तरह बिना रुके सबके मन में बहते हैं ।
उद्योग धंधे व्यापार व्यवसाय नौकरी मजदूरी नेतागिरी, जीवन चलाने के लिए है जरुरी ।
किसी को इसमें महारथ हासिल है और उस कार्य को पूर्ण करने में सभी कहते हैं महारथी ।
होता जब है महाभारत का युद्ध ऐसे श्री कृष्ण श्री अर्जुन के
रथ चलाने वाले सारथी बनते हैं ।
वस्त्र भोजन मकान शिक्षा परिवार ईश्वर, हर मानव को यहां चाहिए ही चाहिए ।
अगर आप सचमुच में लोगों का हित चाहते हैं और आपका संकल्प है इसे पूरा करके दिखाइए ही दिखाइए ।
आप जो है सो तो है ही फिर क्यों निरर्थक दूसरा से दूसरा समझते हैं ।
ईश्वर को भी शत शत नमन जो धरा में कल्याण के लिए बार बार अवतार लेते हैं ।
राम की तरह वनवास जाकर , और कृष्ण की तरह गोपियों के संग लीला कर सुख देते हैं।
रावण कंस दुर्योधन कर्ण दु:शासन जरासंध हिरण्यकश्य जैसे पापियों से धरा को मुक्त करते हैं ।
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