जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-इम्तिहान
विधा-कविता (मुक्त छंद)
जिंदगी में हर पल देना
पड़ता है इम्तिहान ।
पड़ाव फिर भी शेष रह
ही जाते हैं विशेष।
तप कर ही सोना बनता है
दमकता हुआ कुंदन।
लोहा भी ढ़ल कर बनता है
कारीगर का औजार।
परीक्षा हमें सुदृढ़ बनाती है,
जीवन में बढ़ने को ।
मंजिल तक पहुँचने के लिए,
सीढ़ी नया गढ़ने को।
इम्तिहान यदि सीढ़ी है तो
मंजिल हमारा लक्ष्य हो ।
सफलता यदि चुनौती है तो,
मेहनत हमारा अस्त्र हो ।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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