स्थान- दुर्ग (छ.ग.)
विधा- कविता
शीर्षक- इम्तिहान
पग पग इम्तिहान
पल-पल इम्तिहान
ऐ जिंदगी
मैं हूं हैरान
जटिल तेरे प्रश्न
सुलझाऊँ कैसे उलझन
कभी अवचेतन मन में सवाल
कभी चेतन मे कितने जाल
ऊहापोह स्थिति मस्तिष्क की
हल करना मुश्किल,
सरल सहज रहना सदा
रही यही अपनी चाह
फिर क्यूं संघर्ष भरे हर कदम
दुरुह सफर, पहाड़ से चढ़ाव
चले जायेंगे भाग-दौड़ करते
यूँ ही सुकून की तलाश में
सफलता के इंतजार में
बीत जायेगा जीवन
बस यूं ही इम्तिहान में...
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