रचनाकार-एच-एस-अरमो ,अरमान ।
निवास-बायरन बाजार,रायपुर ।
जिला-रायपुर,छत्तीसगढ़ ।
विधा-छ्न्द मुक्त कविता ।
शीर्षक- मनियारी गोटी ।
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¤¤••|| मनियारी गोटी ||••¤¤
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बाल्यावस्था के दिन---
होते कितने सुहाने ,व --
भोलापन लिए होते ,
सिर्फ यारों---
खेलना व खाना ही,
होता था,मूल मकसद,
साथ-साथ ,करनी पड़ती है,
काबिल बनने,पढ़ाई भी--।
मनियारी गोटी तो बन गईं--
बचपन का खिलौना,
खेल-खेल में,
कैसे समय बीतता,
पता ही नहीं चलता था ।
खिलौना तो खिलौना होता--
इसमें कोई भेद नहीं था,
घर के लोग,नाराज भी होते ,
फिर भी खेल का मज़ा,
उसी में आता था--।
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