जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-मनियारी गोंटी
विधा-कविता (मुक्त छंद)
ननपन के आथे सुरता,
अऊ वो मनियारी गोटी|
न कुछु जिनिस के कमी
न थोरको रहे चिंता|
चाकलेट कस सुग्गर
नवा गोटी ल सकेलन|
नई मिलय पीपरमेंट त
महतारी ल ढकेलन|
आनी -बानी के वो खेल
आथे अब्बड सुरता|
मनियारी गोटी के खेल,
ननपन के वो खेल|
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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