जिला:-कांकेर(छ. ग.)
विधा:-आलेख
विषय:-मुस्कुराहट
मुस्कुराहट एक ऐसा भाव जो हमारे चेहरे को और सुंदर बनाता है।मैंने बचपन में अपने विद्यालय की नैतिक शिक्षा की किताब में पढ़ा था कि इस दुनिया में मुस्कुराने की कला ईश्वर ने सिर्फ हम मनुष्यों को दी है।आपने कभी जानवरों या पक्षियों को मुस्कुराते देखा है?नहीं न।फिर भी हम मनुष्य वजह ढूंढते हैं,मुस्कुराने की।कि जब हमारा सब अच्छा चल रहा होगा या हमारे साथ सब अच्छा होगा तब हम मुस्कुरायेंगे।
आपने कभी देखा है,ऐसे बच्चों को जो थोड़े आर्थिक रूप से कमजोर तबके के होते हैं यहां मैं गरीब शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहूंगी क्योंकि गरीब कोई नहीं होता।ईश्वर ने मनुष्य जीवन दिया मतलब वो अमीर ही है।चलिए मुद्दे पर आते हैं ऐसे बच्चों के पास खिलौने नहीं होते।छोटे छोटे बच्चे धूल मिट्टी में खेलते हुए कितने प्यारे दिखते हैं। उनके चेहरे की चमक और मुस्कुराहट को आपने देखा है।क्या गजब की मुस्कुराहट होती है।आपको क्या लगता है?उनके पास सब कुछ है, जो हमारे पास है।नहीं,पर फिर भी वो खुश हैं मस्कुराते हैं और बच्चे ही क्यूँ आपके आस पास ऐसे कई लोग मिल जाएंगे जिनके जीवन में परेशानियों की कमी नहीं फिर भी वो मस्कुराते हैं।
मुझे लगता है अगर कोई सबसे सकारात्मक भाव मनुष्य के पास है, तो वो मुस्कुराहट है।जिससे वो अपने आस पास भी सकारात्मकता फैला सकता है।मेरे लिए मुस्कुराना बिना आँख बंद कर ईश्वर से की गई प्रार्थना है।प्रार्थना का मतलब क्या होता है ईश्वर के सामने अपनी ख्वाहिशों की फेहरिश्त रखना।नहीं,प्रार्थना का मतलब है उनका धन्यवाद करना कि आपने जिस भी परिस्थिति में रखा उसके लिए धन्यवाद।तो आप बताइए कब से कर रहे हैं बिना आंख बंद कर करने वाली ये प्रार्थना।कब से मुस्कुराना शुरू कर रहे हैं।ये मेरे अपने विचार हैं जो मेरी सोच के दायरे तक सीमित हैं जो आपको गलत भी लग सकते हैं।-
कु.गरिमा पोयाम
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