पता :- तमनार ,रायगढ़ (छत्तीसगढ़ )
वर्तमान पता :- सम्बलपुर ओड़िशा
विधा :- कविता (मुक्त छंद )
विषय- तरकीब
लाख तरकीबें करता रहा जिंदगी के लिए l
पर कुछ भी न काफी रहा आदमी के लिए l
बहता चला अपनी मौजों में कल के सपने लिए l
न रहा फुरसत उसे आज ही के लिए l
लाख ......
जमाने की जद्दोजहद में ,
अपने परायों की हद में l
कमाने की अपनी ललक में ,
छोड़ जमी उड़ गया फलक में l
सबको भुला है खुद ही के लिए l
लाख ….....
न संतान अपनी मां का रहा l
न भाई बहनों का बन सका है सगा l
खोकर मानव ही मानवता l
दूर कर अपने मन की भावुकता l
जो न किसी का होके रहा ,
उस वैभव ,धन के लिए
लाख ...........
जो आज है वही अपना है l
कल किसने देखा वो सपना है l
सब यहीं पर रह जएगा l
हाथ खाली था खाली ही जाएगा l
करो काम नेकी का जग में ,
न खो दो सुकून दिल का दो पल की खुशी के लिए
लाख .........
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