स्थान--- नवापारा खुर्द/ सक्ति
जिला--- जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा ---कविता /आलेख
विषय ----मनियारी गोंटी
शीर्षक--- ए मनियारी गोंटी
ए मनियारी गोंटी,ए मनियारी गोंटी,
तोर पाछू मोर नाम धरागे ,ए मनियारी गोंटी ।
रहे रहंव नानकन,धरे रहंव तोला ।
संगी साथी कस लागस, तैंहर मोला ।
मारों कोनों ल परे गारी देवय, कोनो धर कुदावय लौठी ।
तोला बिन बिनके,अतिच मेंहर खेलेंव ।
धरे रहंव मुठा म, बघवा असन बोलेव ।
ककरो चिरे हस लुगरा तैं,ककरो चीरे हस धोती ।
तोला फेंके हंव तरिया भीतरी, तोला रुख उपर ।
तोला फेंके हंव कोकरो छानी,खेले हों चुपर चुपर ।
बस्ता म मोर तैं रहे हस, जैसे हीरा मोती ।
तोला देख डोकरा कांपे, तोला देख डोकरी ।
तोला देख तीर नई आवय,अधेड़ही कोनो छोकरी।
चिहुर पारे सिटिंग साटंग,हंफरत भागे मोटी ।
घर के मन सुनें मारें पीटे,तभो तैं नई छूटे ।
तोला मैं धरे नई रहंव,मन रहे टूटे टूटे ।
मोर बर तैं खेल खिलौना,बैरी बर बान चोखी ।
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