Thursday, February 4, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- विरहिणी

नाम--- गिरधारी लाल चौहान
स्थान ---नवापारा खुर्द/ सक्ति
जिला --जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा ---कविता /आलेख
विषय ---विरहिणी
शीर्षक---- मुझको विरहन बनाया

उसने ही मुझको विरहन बनाया ।
जब देखो तब उसने सताया ।

मैं ऐसी न थी जैसी रह रही ।
 बातों को मैं सच कह रही ।
आंखों में आंसू जो कभी न आया ।

दिल में बसा लो कहा उसने ।
बातों को मान लिया हमने ।
हंसाया उसी ने उसी ने रुलाया ।

मैं खोई न थी किसी की याद में ।
कभी जीई न थी इतनी बरबाद में ।
जो बनाया उसी ने, उसी ने गिराया ।

अब उसकी है फिक्र,जिसकी न थी जिक्र ।
जिसने जीवन किया है तितर बितर ।
आज वो दूर है जो पास आया ।

मैं जल बिन मीन हो गई हूं ।
थी कभी मजबूत खिन्न हो गई हूं ।
जिससे स्नेह की वर्षा आग बरसाया ।

मैं डूबते नाव मजधार हूं ।
दुनियां में सबसे बेकार हूं ।
मुझ पर ए रंग उसने चढ़ाया ।

मैं घायल मयूरी वर्षा देखती रही ।
जिससे खुशियां मिलती दुख मिलती रही ।
ये कैसा दिन दिनकर तूने लाया ।

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...