स्थान ---नवापारा खुर्द/ सक्ति
जिला --जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा ---कविता /आलेख
विषय ---विरहिणी
शीर्षक---- मुझको विरहन बनाया
उसने ही मुझको विरहन बनाया ।
जब देखो तब उसने सताया ।
मैं ऐसी न थी जैसी रह रही ।
बातों को मैं सच कह रही ।
आंखों में आंसू जो कभी न आया ।
दिल में बसा लो कहा उसने ।
बातों को मान लिया हमने ।
हंसाया उसी ने उसी ने रुलाया ।
मैं खोई न थी किसी की याद में ।
कभी जीई न थी इतनी बरबाद में ।
जो बनाया उसी ने, उसी ने गिराया ।
अब उसकी है फिक्र,जिसकी न थी जिक्र ।
जिसने जीवन किया है तितर बितर ।
आज वो दूर है जो पास आया ।
मैं जल बिन मीन हो गई हूं ।
थी कभी मजबूत खिन्न हो गई हूं ।
जिससे स्नेह की वर्षा आग बरसाया ।
मैं डूबते नाव मजधार हूं ।
दुनियां में सबसे बेकार हूं ।
मुझ पर ए रंग उसने चढ़ाया ।
मैं घायल मयूरी वर्षा देखती रही ।
जिससे खुशियां मिलती दुख मिलती रही ।
ये कैसा दिन दिनकर तूने लाया ।
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