जिला-कोरबा, छ.ग.
विषय- तरकीब
विधा- कविता
शीर्षक-तरकीब
----- न जाने क्या क्या तरकीब लगाई
तब जीवन आसान हुआ है
पाषाण युग से मशीनी युग में आना
तरकीबों से ही सुलभ हुआ है ।
किसान भी अब मुक्त हुए हैं कमरतोड़ परिश्रम से ।
न जाने क्या क्या तरकीब लगाई तब
फसल उगाना सरल हुआ है ।
कितना जटिल था आवागन और संचार विभाग,
तरकीबों ने ही सहज किया है ,.पल भर में संदेशों का आना.जाना।
और पल भर मे मीलों दूरी तय कर जाना ।
कोई गृहणीं ही बयाँ कर.पाऐ ,
कितना कठिन था रसोईघर में भोजन बनाना ।
तरकीबों के माध्यम से ही उसको भी नवजीवन मिला है ।
समृद्ध हुआ है विश्व का अब कोना -कोना नित नव नूतन तरकीबों से ।
हाँ यह सच है , जिसनें भी तरकीब लगाई ,मंजिल उसी ने पाई है ।
।।इति।।
" गोमती सिंह"
कोरबा, छ.ग.
बहुत सुन्दर कविता, मनुष्य नित नई तरकीबों से ही विकास की इस ऊंचाई तक पहुंचा है
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