रचनाकार-एच-एस-अरमो ,अरमान ।
निवास-बायरन बाजार ,रायपुर ।
जिला-रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
विधा- छ्न्द मुक्त कविता ।
शीर्षक-"" मुस्कुराहट "" ।
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▪▪●मुस्कुराहट ●▪▪
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एक बार हम तुम---
जरा मुस्करा के तो देखें,
ये दुनिया,कितनी हंसीन लगती है ।
एक बार,हम तुम--
मुस्कुराकर दिन की,
शुरुआत तो,कर के देखें,
सारा दिन,ऊर्जावान और उत्साही,
मन से,काम करते जायेंगे--।
उदास चेहरे को--
जहान में,कौन पसन्द करता है,
कोई कहता है कि--
सदा रोनी सूरत,दिखती तुम्हारी ,
वह कहे,ऐसी सूरत ही है हमारी--।
हरदिन खुशनुमा बनाने--
आओ खुलकर मुस्कुराहट,
अपने चेहरे में लायें ,
तनावमुक्त दिन गुजरेगा,
औरों को भी,खुश कर जाओगे ।
हँसना-मुस्कुराना,अच्छी बात है--
पर,किसी की कमियों पर हँसना,
मूर्खता की,बात है ।
हँसना-मुस्कुराना सीखें--
किसी की प्रगति व सम्मान में,
प्रोत्साहित करने के लिए हँसें--।
मुस्कुराहट तो,कुदरत की देन है--
इसे ,हरगिज़ छिपाये न ,
खुलकर मुस्कुरायें ताकि,
औरों की,जिंदगी भी,
सदा के लिये,खुशनुमा बन जाये ।
सेवा भावना में---
दर्द नहीं,मुस्कुराहट हो,
दिखावटीपन का,एहसास न हो,
किसी गिरते को उठाने में,
जो सुकून मिलता है,
ऐसा करतब,एक बार,कर के,
देखो तो यारों,
ऐसा करने का,संदेश दे दो यारों--।
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