जिला:-कांकेर(छ. ग.)
विधा:-आलेख
विषय:-पूर्वाग्रह
पूर्वाग्रह का अर्थ होता है पहले से निश्चित कर रखा गया मत या कहना चाहिए,जब हम किसी व्यक्ति,विषय पर पूर्व निर्णय कर अपना एक मत बना लेते हैं कि ये घटना ऐसी घटी है, या ये व्यक्ति या ये विषय ऐसा है। तो वो पूर्वाग्रह कहलाता है।
पूर्वाग्रह मत रखने वाला व्यक्ति और जिस पर मत रखी गयी है उस व्यक्ति दोनों को प्रभावित करता है।कबीर जी ने कहा है:-
निंदक नियरे राखिए,
आंगन कुटी छवाय।
बिन पानी साबुन बिना,
निर्मल करे सुभाय।
जिसका अर्थ होता है "हमें अपनी निंदा करने वालों को अपने आस पास रखना चाहिए क्योंकि वो अपनी निंदा से हमारे मन का मैल दूर करते हैं और इसके लिए पानी और साबुन की जरूरत भी नहीं पड़ती।"लेकिन आप ही सोचिए आप ऐसे निंदकों का क्या करेंगे जो आपके बारे में ऐसी बातें फैलाते हैं जैसे आप हैं ही नहीं।
पूर्वाग्रह उस व्यक्ति जिसके बारे में इस तरह की बातें फैलाई जाती है उसे गहरे अवसाद में डाल सकता है।इन परिस्थितियों में वह व्यक्ति आत्महत्या भी कर लेता है और पूर्वाग्रह सिर्फ उस आत्महत्या करने वाले व्यक्ति के लिए घातक नहीं होती बल्कि पूर्वाग्रह रखने वाले व्यक्ति के लिए भी नुकसानदायक है क्योंकि पूर्वाग्रह रखने के कारण उसकी मानसिकता विकृत हुई।उसने स्वयं के मस्तिष्क में तो पूर्वाग्रह को जगह दी ही।साथ ही अपने आस पास के लोगों के मन में भी यह बात डाली की ये तीसरा व्यक्ति ऐसा है।अब तीसरे व्यक्ति के आत्महत्या करने के बाद ये सिद्ध कर भी दिया गया कि वह व्यक्ति वैसा नहीं था।तो क्या फायदा उसकी जान कोई वापस ला सकता है?
अब सवाल उठता है पूर्वाग्रह जन्म कहाँ लेती है।मुझे लगता है पूर्वाग्रह जन्म वहाँ लेती है जहाँ विवेक शून्यता होती है और इसे एक विवेक शून्य व्यक्ति अन्य विवेक शून्य व्यक्तियों तक पहुंचा दे तो यह विकराल रूप ले लेती है और जिसके लिए रखी गई है उसके लिए घातक सिद्ध होती है अगर वो कमजोर दिल और मन वाला व्यक्ति है।विवेकशील व्यक्ति पूर्वाग्रह रख ही नहीं सकता।क्योंकि जिसके पास विवेक होगा वह किसी भी बात पर आसानी से यकीन नहीं करेगा जब तक स्वयं जांच पड़ताल न करे तर्क-वितर्क न करे।ये मेरे अपने विचार हैं जो मेरी सोच के दायरे तक सीमित हैं जो आपको गलत भी लग सकते हैं।
-कु.गरिमा पोयाम
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