संबलपुर,जिला-कांकेर, (छ. ग.)
विषय-बसन्त,
दिनाँक-30.01.21
*बसन्त*
बसन्ती मधुमास लिए
लो बसन्त आया,
प्रकृति भी स्वागत में नव
यौवन का रूप धर आया।
पतझड़ी एहसासों पर
ऋतुराज बसन्त छाया,
जगती के जीव -जंतु
सबका मन हर्षाया।
सरसों संग आम्रमंजरी
भी इठलाया,कोयल
की कुहू-कुहू ने अमराई
में धूम मचाया।
विहगों के कलरव,भँवरों के
गूँजन से जग भरमाया,
विरही मन भी कामदेव
के प्रहार से घबराया।
शीतल,मन्द बयार से
जग है बौराया,
मन के राग,अनुराग से
यौवन है मुस्कुराया।
नव तरू,नव पल्लव,
नव प्रसून ने नव छवि दिखाया,
शिशिर की बिदाई हुई नव
बसन्त ने नव सौन्दर्य बिखराया।
*व्याख्या*-प्रस्तुत कविता में बसन्त के आगमन से प्रकृति में होने वाले परिवर्तनों के बारे में बताया गया है।बसन्त ऋतुओं का राजा है। जीव जन्तुसब प्रसन्न है।
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नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर, (छ. ग.)
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