Thursday, January 7, 2021

सुकमा से गावस्कर कौशिक की रचना- अश्क़

रचनाकार- गावस्कर कौशिक
जिला - सुकमा, छत्तीसगढ़
विषय - अश्क
विधा -   मुक्तक
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भीड़ में भी हम  अक्सर तन्हा रहते हैं,
मोहब्बत के दर्द को खुद ही  सहते  हैं।
छोड़ के ऐसे गयी वो हरजाई  हमें कि-
आँखों से हरदम अब अश्क  बहते  हैं।।

कब तक यूँ  ही अश्कों  की बरसात  होगी,
जाने कब  उनसे  फिर ये  मुलाकात  होगी।
तब लिया जायेगा  हमारा  ही  नाम पहला-
जब भी इश्क में पागल होने की बात होगी।।

घुट घुट के जीना हमारा  मुकद्दर  हो गया,
हार गए इश्क में हम वो सिकन्दर हो गया।
एक  समंदर  था  कभी इन आँखों  में जो-
सुख गए अश्क अब  दिल पत्थर हो  गया।।
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          गावस्कर कौशिक  सुकमा छ्ग

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