स्थान --नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला --जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा-- कविता/ आलेख
विषय --अश्क
शीर्षक-- अश्क भरे जीवन
अश्क भरे जीवन, ठुकराए नहीं जाते ।
ये होते हैं अपने,इसको बताए नहीं जाते ।
आया है तो आया है, अपना क्या जाता ।
बनाता बिगाड़ता वही , अपना नहीं नाता ।
जलते हुए जीवन को,बुझाए नहीं जाते ।
पत्थर मिलते राह में, कांटे भी तो है ।
कष्ट ही नहीं देते,सुख के राह दिखाते भी तो है ।
सिर्फ सुखों के सहारे जीवन,चलाए नहीं जाते ।
आई हैं कुछ पल का अंधेरा,कट भी जायेगा ।
उसके बाद रोशनी जगमगाती, नजर आएगा ।
राह होते हुए कोई राह ,अपनाएं नहीं जाते ।
सुख के बाग भी , मिलते हैं सबको उजड़ते ।
कोई कह नहीं सकता, बहार ही है यहां रहते ।
जिनके दर पर सब होते, सभी गिनाएं है जाते ।
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