जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - अश्क
विधा - छंदमुक्त कविता
शीर्षक - " माँ की आँसू "
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आँखों से आँसू आज भी बरसती है।
एक बूढ़ी माँ, बेटे से मिलने को तरसती है।
नजरें कमजोर, पर आस अभी भी है बाकी,
कब आयेगा मेरा लाल, हर रोज ओ माँ कहती है।।
बुढ़ापे का मेरा, बेटा ही सहारा था।
आँखो का मेरा तू ही तो तारा था।
डुबती कश्ती का तू मल्हार,
मेरा एकमात्र किनारा था।।
वचन दिया था जल्दी आने का।
साथ मुझे अपने ले जाने का।
अश्क बहा रही अब तक इंतजार में,
मन लगता नहीं कुछ भी खाने का।।
अपनी माँ को क्यों सता रहा।
झुठा दिलासा क्यों जता रहा।
हो गया कुर्बान मातृभूमि पर तू,
ऐसा क्यों मुझे ये बता रहा।।
माँ तेरा बेटा देश पर बलिदान हुआ है।
आहूति देश पर उसका जान हुआ है।
आँसू मत बहा मइया तू थोड़ी भी,
दुश्मनों से लड़ते तेरा बेटा कुर्बान हुआ है।।
अंतिम सांस में भी मुस्कान था।
मुख में भारत माता का नाम था।
सीने में गोली खाई उसने बहुत,
हाथ में तिरंगा,जुबाँ में राष्ट्रगान था।।
आँसू पोंछ ले माँ तू,
बेटे की अंतिम विदाई है।
मार्मिक दृश्य देखकर सबकी,
आँखों में अश्रु भर आई है।।
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मौलिक रचना ( स्वरचित )
संतराम कुम्हार
बलौदाबाजार (छ.ग.)
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