जिला--कोरबा
विषय--सायक
विधा--कविता
शीर्षक--सायक
---तरकस और जबान, होते एक समान।
सायक तरकस से जब निकालो लक्ष्य का अनुसंधान कर.लो ।
जबान तरकस से जब शब्द तीर छोड़ो सार्थकता का अनुमान कर लो ।
जबान से निकले तीर , घाव करे गंभीर ।
वक्त के साथ ये हो जाता नासूर है ,
नहीं उपचार कोई इसका,
चाहे आ जाये कोई हकीम पीर ।
शब्द के प्रभाव से ही अंजान बन जाते हैं मीत ,
शब्द तीर के वार से ही ,सदियों के मीट जाते हैं प्रीत ।
आगाह करती" सिंह" यहाँ,
जबान तरकस से छोड़ो जब सायक
सार्थकता का अनुमान कर लो ।
तीर तरकस से जब निकालो ,
लक्ष्य का अनुसंधान कर लो ।
।।इति।।
" गोमती सिंह"
कोरबा, छत्तीसगढ़
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