स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता
शीर्षक -"तीर"
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तरकस का तीर
मचलता है
जब चलता है
युद्ध में वीर
अद्भुत- अदम्य
साहस का बल
बढ़ा देता
युद्ध में तीर
निशाना साधता
जब वीर
लक्ष्य भेदता
युद्ध में तीर
शत्रु की हर
वार का
प्रतिउत्तर देता
युद्ध में तीर
कभी अग्नि तो
कभी जल
बरसाता
युद्ध में तीर
गांडीव में प्रत्यंचा
चढ़ता तीर
तो जीत दर्ज करता
युद्ध में वीर
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