Friday, January 29, 2021

गिरधारी लाल चौहान कृत आलेख:- भूख

नाम ---गिरधारी लाल चौहान
स्थान ---नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़ ।
विधा ---आलेख
विषय --भूख ।
शीर्षक ---कैसे मिटे भूख 

भूख शब्द की व्याख्या करना इतना सहज सरल नहीं है ,भूख से कई आशय हैं इसका निश्चित क्षेत्र में बांधना और कथन करना कठिन है। जैसे पेट की भूख,ज्ञान की भूख, दौलत की भूख,प्यार की भूख , जिसे प्राप्त करने की इच्छा हो वह है उसकी भूख, जिसके अभाव में मिलता है दुख उसे पाने के बाद ही मन को शांति मिलती है हम यहां पेट की भूख की बात करते हैं जो सभी कारकों में महत्वपूर्ण है और उससे सभी प्रभावित होते हैं ।जिसे मिटाने के लिए दुनियां के लोग कई समूह कई संस्थाएं कई दानदाता परिवार के नारी पुरुष साधू सज्जन राजनीतिज्ञ पत्र पत्रिकाएं कलाकार
एड़ी चोटी का मेहनत कर रहे हैं जिसमें सफल नहीं हो पा रहे हैं उसके कई कारण है , कारणों के निदान में हजारों कठिनाईयां है कोई इन कारणों को बढ़ावा दे रहा है । और कोई बढ़ावा देने वालों का सहयोग कर रहा है , कोई इसे विद्यमान रखना चाहता है जिससे उसकी स्वार्थ की पूर्ति हो सके । इससे उसे आनंद है, और वह आनंद का पिटारा लेकर घुम रहा है ।होने वाले परिवर्तन से उसका सब कुछ लूट जाने का मन में भय व्याप्त है उसकी सोच के अनुसार उसकी रक्षा कर रहा है जिसकी जो वस्तु है उसकी रक्षा करना उसकी कर्तव्य बनता है ।
आज भूख सारे देश की ज्वलंत समस्या है भूख की मार झेलने वाले कितने लोग हैं इसका स्पष्ट आंकड़ा नहीं है समय-समय पर होने वाले सर्वेक्षणों का सहारा लिया जा सकता है ।
वर्तमान समय में भूख अगर व्यक्तियों को सता रहा है उससे पीड़ित हैं छुटकारे की व्यवस्था नहीं है मानव के लिए कलंक है हमारे विकास पर प्रश्न चिह्न है हमारी शिक्षा को धिक्कार है   ।इसे जैसे भी हो मिल जुल कर मिटाने का संकल्प होना चाहिए और इसे मिटना चाहिए ।
आओ भूख विहीन समाज बनाएं ।
लगे मानवता के कलंक मिटाएं ! 

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