स्थान-- नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला-- जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा --कविता/आलेख
विषय --कहार
शीर्षक --कहारों के दिन
कहारों के दिन लद गए,दहेजों का दिन लद जाए ।
बेटियों का हो सुखमय दिन,वह दिन शीध्र आए ।
बेटियों के लिए मानसिकता ने करवट बदली है ।
तड़पती हुई बेटियां पहले से वास्तव में सम्हली है ।
बेटे बेटियां है एक समान,हर कोई यह गीत गाए ।
युगों-युगों से सतायी जा रही थी सभी बेटियां ।
रीतियों रिवाजों की भेट चढाई जा रही थी बेटियां ।
बेटियों के लिए गलत परम्पराएं मिटाया जाए ।
सम्मानित हो पग पग पर जिसकी वह अधिकारी ।
मां बेटी बहन बंधू वह सिर्फ कहलाये न नारी ।
सम्मान का जो ताज है सिर पर नजर आए ।
नारी का त्याग न हो और नारी का न हो हरण ।
जीते जी न जलायी जाये सुरक्षित हो जीवन ।
उन पर अत्याचार न हो न ऐसी कहानी लिखा जाए ।
नारी सुकोमल ममता की मूरत जग में बनी रहे ।
तारणी उद्धारिणी संवारिनी बन हर पल तनी रहे ।
जग उससे परास्त हो कभी न उसको जीता जाए ।
नारियों से उत्पति का विधान ईश्वर प्रदत्त यह अनुपम वरदान
उनके नाम से कलंकित कुलसित दूषित घृणित न बने पहचान ।
कर्म गीतों के देने वाले उनके यश भरपूर गीता भी गाए ।
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