जिला --कोरबा
विषय--कहार
विधा--छंद मुक्त कविता
शीर्षक--"दृश्य बिटिया के विदाई का "
बाबूल के आंगन में नाजों से पली ,
प्यार , दुलार को यादों में संजोकर
कहारों के कंधों में होकर डोली में सवार,
नाजुक सी बिटिया चली ससुराल।
मिलन और बिछोह दोनों साथ-साथ
है ये कैसा अनोखा रिवाज ।
बाबूल के आँगन की अल्लहड़ सी गुड़िया,
संभालने चली अंजान अजनबी परिवार।
कहारों के पांव भी लगे थरथराने आँखों से आंसू है बहनें लगे ।
लाडों का भार उनसे भी सहा नहीं जाता ,
फिर भी चले निभाने एक रस्मों रिवाज ,
बिटिया की डोली को पहुंचाने चले ससुराल ।
कहारों के कंधों में होकर डोली में सवार भोली सी गुड़िया चली ससुराल।
।।इति।।
" गोमती सिंह"
कोरबा , छत्तीसगढ़
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