Monday, January 11, 2021

कोरबा से गोमती सिंह की रचना- कहार

रचनाकार--गोमती सिंह
जिला --कोरबा 
विषय--कहार 
विधा--छंद मुक्त कविता
शीर्षक--"दृश्य बिटिया के विदाई का "


बाबूल के आंगन में नाजों से पली ,
प्यार , दुलार को यादों में संजोकर
कहारों के कंधों में होकर डोली में सवार,
नाजुक सी बिटिया चली ससुराल।
मिलन और बिछोह दोनों साथ-साथ 
है ये कैसा अनोखा रिवाज ।
बाबूल के आँगन की अल्लहड़ सी गुड़िया, 
संभालने चली अंजान अजनबी परिवार।
कहारों के पांव भी लगे थरथराने आँखों से आंसू है बहनें लगे ।
लाडों का भार उनसे भी सहा नहीं जाता ,
फिर भी चले निभाने एक रस्मों रिवाज ,
बिटिया की डोली को पहुंचाने चले ससुराल । 
कहारों के कंधों में होकर डोली में सवार भोली सी गुड़िया चली ससुराल।
      ।।इति।।
     " गोमती सिंह"
     कोरबा , छत्तीसगढ़

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