सुंदरगढ़ ओड़िसा
विधा-आलेख
विषय-महक
महक से आशय उन सुगंधों से है जिससे हमारा मन प्रफुल्लित और प्रसन्नचित हो जाता है। अगर हम महक की बात करें तो फूलों का महक हमें पहले याद आता है, सृष्टि ने जितने फूल दिए हैं उतनी ही अलग -अलग तरह की खुशबुएँ भी।भोजन का महक तो भूख को और अधिक प्रज्ज्वलित करती हैं मन अनायास ही रसोई की ओर खींचा चला जाता है और हम महक से ही भोजन का स्वाद ले लेते हैं।
महक का हर किसी के जीवन मे अलग ही महत्व है।किसान को अपने धान की बालियों में महक आती है, भूखे को भोजन में और प्रियतम को अपनी प्रियतमा के आने की
आहट से ही महक आने लगती है।महक का जादू तो एक अंधा इंसान भी पहचान लेता है गुलाब,चमेली ,चंपा ,जूही या मोगरा सभी महक के दीवाने होते हैं।रात रानी की महक रातों को महकाती है।परंतु मिट्टी की सोंधी -सोंधी महक हर किसी को पसंद होती है, बसन्त ऋतु में पूरा वातावरण ही महक से भर जाती है।आम की मंजरियों की महक सबका मन मोह लेती है।प्रकृति ने हमे तरह-तरह की महक से नवाजा है जो हमारे जीवन को महकाती है। हमें जीवन मे काम भी ऐसा करना चाहिए जिसकी महक चारो ओर फैले।
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