जिला --कोरबा, छ.ग.
विषय--महक
विधा--आलेख
शीर्षक--महक
महक , महक ऐसा शब्द है जिसके उच्चारण मात्र से मन पुलकित, सुवासित हो जाता है । महक शब्द का अर्थ भी खुशबू, सुगंध होता है । जिस तरह गुलशन या बागीचे में लगे पुष्पों की खुशबू हवाओं के झोंके से मिलकर फिजाओं को सुगंधित कर देती है , ठीक उसी प्रकार से हम इंसानों के सत्कर्म हमारे जीवन को यश, प्रसिद्धि जैसे महक से भर देती है।अत: हमें सदैव सत्कर्म करते हुए प्रसन्नता और खुशी महसूस करना चाहिए । अच्छे कर्मोँ की खुशबू हमारे ईष्टदेव तक पहुंचती है जिसके फलस्वरूप हमें जीवन में सफलता दर सफलता प्राप्त होती है । और हम खुशहाल जीवन ब्यतीत करते हैं ।
और हमारे मन के बागीचे को भी सुंदर विचारों से महकाने चाहिए । और जिंदगी को प्रफुल्लित बनाने चाहिए।
।।इति।।
" गोमती सिंह"
कोरबा, छ. ग.
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