Tuesday, January 12, 2021

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- कहार

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
    संबलपुर जिला-कांकेर,( छ. ग.)
        विषय-कहार, 
            दिनाँक -12.01.21
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                 *कहार*

कहारों के काँधों पर 
डोली बैठ चली 
बिटिया रानी,भूल कर 
मायके की गली।

यादों के सारे जेहन में 
अवगुंठन ओढ़ी,
मधुर स्मृतियों वाली 
बचपन छोड़ी।

माँ का सिसकना,सखियों 
संग बहनों का बिछड़ना,
पिता की विवशता,
भाई का तड़पता छोड़।

नव प्रीत,नव रीत से बंधी 
पिया मिलन की आस जगी,
कहारों के काँधे बैठ 
नवजीवन का सपन संजोएं
लगती भली।

सोलह शृंगार किए 
डोली से झाँकती,
सात फेरे  लिए जिनके संग 
उन्हें नजरें ताकती।

कैसी होगी ससुराल की देहरी 
मन ही मन बोलती,
कहारों के व्यवहार से 
अपने भावी जीवन नापती।

जीवन में मधुमास रहे,
कहार देते आशीष घनी,
मृदु बैनों के संग प्रेम,
सेवा,लाज से है सनी।

युग बदले रीत बदली,
बदली सारी नीति,
भूले लोग डोली और 
कहारों की सुंदर रीति।

     नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)

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