जिला--कोरबा
विषय--किसान
विधा--कविता
शीर्षक--किसान
---किसान भूमि पर हल चलाता ,
मेहनत करके फसल उगाता
विश्वधरा के इंसानों का क्षुधा शान्त वह करता ।
कभी सोंचा हमनें उसके हक में !
उसको क्या है मिलता ?
भूख , गरीबी , फटेहाल वह जीवनयापन करता।
विडंबना है अपने देश में उसको उसके श्रमसींकर से सिंचित फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलता ।
कानून बनाने वालों से फरियाद यहाँ पर "सिंह" का है,
उसका अभिमान न तोड़ाजाये ।
उचित दर पे किसानों के श्रम का सम्मान बढाया जाये।
वो साक्षात देवता हैं इस धरती का धरती को स्वर्ग बनाते हैं
उसके श्रमबूंदो से भीगकर माँ वसुंधरा लहराती हैं ।
फर्ज बनता है वसुधा के पूत्रों का ,कृषकों का सम्मान करें ,
मेहनत का उनके मूल्य चुका कर
उनकी क्षुधा भी शान्त करें ।
।।इति।।
" गोमती सिंह"
कोरबा, छत्तीसगढ़
No comments:
Post a Comment