Friday, January 15, 2021

बलौदाबाजार से लीलाधर कुम्हार की रचना- मल्लाह

रचनाकार - लीलाधर कुम्हार
जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग. )
विषय - मल्लाह
विधा - दोहा छंद
शीर्षक - गुरु मेरे मल्लाह
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        // गुरु मेरे मल्लाह //

                      ( १ )

गुरु ज्ञान की नौका है , गुरू कृपा  पतवार ।
गुरु  मेरे  मल्लाह हैं , भव  से  करते  पार ।।

                       ( २ )

भवसागर के भँवर में , गुरु बिन कौन सहाय ।
बनकर के  मल्लाह वे , मुझको पार  लगाय ।।

                      ( ३ )

मेरा मन  कहता फिरे , गुरुजी   तारणहार ।
नाव वही नाविक वही , वही  बने  पतवार ।।

                       ( ४ )

संसार की  सरिता में , कब तक  बहूँगा मैं ?
जब गुरु मेरे मल्लाह , तब क्यों डरूँगा मैं ??

                      ( ५ )

गुरु रूप में आये प्रभु , भक्ति मुक्ति प्रदाता ।
जीवन के माँझी  वही , सर्वस्व  का  नाता ।।

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नोट - यह रचना मौलिक एवं स्वरचित है जो गुरुभक्ति का दिग्दर्शन कराती है ।

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