जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग. )
विषय - मल्लाह
विधा - दोहा छंद
शीर्षक - गुरु मेरे मल्लाह
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// गुरु मेरे मल्लाह //
( १ )
गुरु ज्ञान की नौका है , गुरू कृपा पतवार ।
गुरु मेरे मल्लाह हैं , भव से करते पार ।।
( २ )
भवसागर के भँवर में , गुरु बिन कौन सहाय ।
बनकर के मल्लाह वे , मुझको पार लगाय ।।
( ३ )
मेरा मन कहता फिरे , गुरुजी तारणहार ।
नाव वही नाविक वही , वही बने पतवार ।।
( ४ )
संसार की सरिता में , कब तक बहूँगा मैं ?
जब गुरु मेरे मल्लाह , तब क्यों डरूँगा मैं ??
( ५ )
गुरु रूप में आये प्रभु , भक्ति मुक्ति प्रदाता ।
जीवन के माँझी वही , सर्वस्व का नाता ।।
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नोट - यह रचना मौलिक एवं स्वरचित है जो गुरुभक्ति का दिग्दर्शन कराती है ।
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