जिला- कोरबा, छ.ग.
विषय- भूख
विधा-आलेख
शीर्षक- अन्न भूख
------भूख , भूख तो अनेक प्रकार के होते हैं जैसे- ज्ञान की भूख, प्रसिद्धि यानिकी यश सम्मान की भूख , धन इकट्ठा करने की भूख , ममता, प्रेम, स्नेह की भूख इन सभी भूखों के लिए अपने अपने क्षेत्रीय पुरुषार्थ करने होते हैं । और सभी मनुष्य अपने भूख को.मिटाने के लिए आजीवन प्रयासरत रहते हैं । लेकिन अगर उपरोक्त सभी प्रकार के भूख को तृप्त नहीं कर पाने मे दुख होता है असफलता का एहसास होता है ।
लेकिन वर्नित सभी प्रकार के भूख से महान भूख है " अन्न की भूख " अन्य सभी भूख के अभाव में अतृप्ति में केवल दुख होता है मगर अन्न की भूख असहनीय होती है इसके अभाव में मनुष्य की मृत्यु तक हो जाती है ।
इसलिए हम सभी मनुष्यों को अन्न का सदुपयोग करना चाहिए और कुछ ऐसे भी लोग हैं जिन्हें दो जून के अन्न नहीं मिलते ऐसे लोगों की सहायता करनी चाहिए । यही मनुष्य का सबसे बड़ा पुरुषार्थ, ज्ञान, धर्म तथा कर्म है ।
।।इति।।
" गोमती सिंह"
कोरबा, छ.ग.
बहुत सुंदर,सार गर्भित लेख।
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