जिला- कोरबा, छ.ग.
विषय- छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत
विधा-आलेख
शीर्षक-छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत
--- छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत छ.ग. का प्राचीन. धरोहर है । हमारे छ.ग. की एक प्राचीन धरोहर है यहाँ की लोक संगीत जैसे सुआ नाच, कर्मा , राउत नाचा आदि विभिन्न नृत्य संगीत हैं , जिनकी अलग लय , ताल , सुर होते हैं प्राचीन समय में यही सब मनोरंजन के साधन होते थे । जो अभी के समय में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आविस्कार हो जाने की वजह से बहुत कम देखने. को मिलते हैं । इसी तरह जैसे पंडवानी हमारे छ. ग. की बहुत प्राचीन तथा लोकप्रिय गाथा है जो महाभारत काल के प्रसंगों को गाते हुए साथ ही साथ नृत्य करके प्रस्तुत किया जाता है । इसी तरह विभिन्न त्यौहार भी छ.ग. के सांस्कृतिक धरोहर हैं विरासत हैं । जैसे एक त्यौहार होता है "नावा खानी " यह त्यौहार हिन्दी. नववर्ष चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में मनाया जाता है जो छ.ग. के गांवों में सभी किसानों के घर मनाया जाता है । इस त्यौहार का आज भी उतना ही महत्व है जितना कि प्राचीन समय में था । इस त्यौहार में सभी किसान अपने फसल का पहला बाली काटकर पकाते हैं तथा अपने कुल देवी देवता में भोग अर्पित करते हैं उसके बाद प्रसाद रुप में घर के सभी सदस्य ग्रहण करते हैं ।
. इस तरह से देखा जाय तो छ.ग. का सांस्कृतिक विरासत अत्यधिक प्राचीन और समृद्ध है । जिसे सुरक्षित रखने के लिए सरकारी प्रसाशन पुरजोर कोशिश में है ।
।।इति।।
" गोमती सिंह"
कोरबा, छ.ग.
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