जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विषय - सुभाष चंन्द्र बोस
विधा - छंदमुक्त कविता
शीर्षक - " मातृभूमि का सिपाही "
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भारत में अमर आपकी कहानी है।
वीरों के वीर सुभाष बलिदानी है।
आजाद हिन्द फौज के नेतृत्वकर्ता,
वीर रस ही आपकी निशानी है।।
कांपते थे थर-थर आपके एक हुंकार से।
अंग्रेजों को खदेड़ा तेज चमकती तलवार से।
वीरता की गाथा गाती ये इतिहास,
जमीन लथपथ थी खून की धार से।।
खून के बदले आजादी,इनका ही नारा था।
गुलामी के कश्ती को,दिया स्वतंत्र किनारा था।
इंकलाब से गूंजती ये मातृभूमि,
भारतमाता का यही राजदुलारा था।।
ज्वालामुखी से खेलने वाले,
डरा नहीं करते अंगारों से।
सिंहासन हिल उठता शत्रु का,
सिर्फ जय हिन्द की नारों से।।
केसरिया रंग तिरंगा का,
शौर्य इनकी जगाते थे।
फिरंगियों को धूल घटाकर,
शान से झंडा फहराते थे।।
दुश्मनों से लड़ते रहे,
जब तक तन में जान था।
भारत का ओ वीर सिपाही,
सुभाष चंद्र बोस जिनका नाम था।।
खून की होली खेलकर जिसने,
आजादी हमें दिलाई है।
याद करने की शुभ घड़ी उनको,
जयंती के रुप में चली आई है।।
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मौलिक रचना ( स्वरचित )
संतराम कुम्हार
बलौदाबाजार (छ.ग.)
Very Nice
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