जिला :- महासमुन्द
विषय :- सुभाष चन्द्र बोस
विधा :- कविता
शीर्षक :- याद रहेगी अरसों तक
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देश प्रेम का चोला पहने,
युद्ध लड़े जो बरसों तक।
उनके साहस की गाथाएं,
याद रहेगी अरसों तक।
याद रहेगा उनका नारा,
जन - जन में जिसने जोश भरा।
जिसकी सुनकर आह्वान,
धधक उठा जर्रा - जर्रा।
कटक धरा पर जब वे आए,
हर्षित भारत वर्ष हुआ।
दिशा मिली थी नवल राष्ट्र को,
भारत का उत्कर्ष हुआ।
जय हिन्द की सेना गढ़कर जिसने,
आजादी का युद्धघोष किया।
थी धन्य वो कोख जननी की,
भारत को जिसने बोस दिया।
रह गया रहस्य भले शहादत,
पर रंग लाई उनकी कुर्बानी।
मुस्काती दुल्हन सी सज-धज,
आजादी आई ओढ़े धानी।
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