स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता
शीर्षक -"किसान"
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किसान ही ,हरियाली लाता
धरती से ,सोना है उपजाता ।
अ-र-त-त ,जब गूंजे खेतों में
तो धरा संग अम्बर भी मुस्काता ।
रोटी कपड़ा, या हो मकान
सब पाते जब उपजे खेतों में धान ।
खेतों में रहता, किसान का ध्यान
फसल देख कर,तन में आ जाये प्राण।
मेहनत करता ,बोता धान
फिर भी है ,गरीबी में देखो जान।
बाग को देखें,जैसे कोई माली
खेतों में चलते किसान के पांव है खाली ।
नहीं चाहिए गाड़ी बंगला
हरियाली से रहे हर समय पाला ।
भगवान की माया, किसान की काया
अन्न उपजाने का वरदान है पाया ।
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