Wednesday, January 13, 2021

अजय पटनायक की रचना- किसान

रचनाकार:- अजय पटनायक
जिला- रायगढ़, छतीसगढ़
विषय:- किसान
शीर्षक:- अन्न दाता

   🌱 *अन्न दाता*🌱
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जय हो जय जय कार,अन्न के हो तुम दाता।
करते पालनहार, देश के भाग्य विधाता।।
करते हो हड़ताल,नही तुमको है भाता।
सुने पड़े है खेत,देखो तुमको  बुलाता।

काट पेट के भाग,सभी के दुख को हरते।।
लिपटे मिट्टी धूल,अन्न से धरती भरते।।
आज हुये श्मशान,क्यो है गुस्सा आया।
नेता वाणी छोड़,बोल किसने बहकाया।

तुमसे है संसार,स्नेह खेतों पर बोते।
बैठ फसल भंडार,देश का बोझा ढोते।
समझो आज किसान,रोष से नाता तोड़ो।
चलो खेत खलिहान,साथ दुश्मन का छोड़ो।

छूकर तेरे हाथ,मृदा भी खुश हो जाते।
चुगते पंक्षी खेत,जानवर सुख से खाते।
अब तो कर उपकार,वक्त कीमत पहचानो।
 पीछे पड़ते लोग,मानसिकता तुम जानो।।

वसुंधरा के वीर,मनुज के है रखवाले।
कंटक बोये बीज,पड़े पैरों में छाले।
दुश्मन तेरे साथ,खड़े है लेकर भाला।
व्याकुल है इंसान,खोल सड़को का ताला।।

करो ना कोई मोल,कृषक देते है सोना।
बना कृषक को आड़,नफरत तुम ना बोना।
देख देश का हाल,कभी आपा ना खोना।
देकर प्यार दुलार,पाप अपना मत धोना।।

खेती है अनमोल,दूर ना इससे  भागो।
करो किसानी काम,जिद  को अब तुम त्यागो।
करलो अब तो बात,बात सरकारी मानो।
होगा जग कल्याण, बात ये तुम जानो।।

       मौलिक रचना 
    अजय पटनायक
   रायगढ़,छत्तीसगढ़

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