स्थान-- नवापारा खुर्द सक्ति
जिला--- जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा--- कविता/आलेख
विषय --किसान
शीर्षक--जय हो किसान की ।
जय हो किसान की,उस भगवान की ।
जिसके हाथों में अन्न उपजे
धरती पुत्र महान की ।
हल बैल के सहारे,जो जीवन अपना गुजारे ।
हर मौसम करें खूब मेहनत, ऐसे इंसान की ।
घर जिनका टूटी --फूटी,रुखी सुखी जो खाये।
सादगी से भरा जीवन,अमृत जैसे जुबान की ।
खूब सेवा करें धरती की,जी जान उस पर लुटाये।
संकट से लड़ने वाला, नहीं कोई अरमान की ।
उसके खेत में गंगा बहती,सारे देव घर में बसते ।
सभी पुरुषार्थ उसके आंगन में रहते जहान की ।
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