जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-रुह
विधा- कविता (मुक्त छंद)
देख सकते हैं अनंत आकाश पर
चमचमाते सूरज चाँद- सितारे,
नहीं देख पाते किसी के रुह को|
हर मानव का प्रेम और अपऩत्व
एहसास दिला देता है आत्मा ही
परमात्मा का अति सूक्ष्म रुप है|
स्थूल शरीर तो नश्वर है जीवन में
पर आत्मा तो अमरअनश्वर है
हर रुह के एहसास को समझे|
आओ इस जीवन यात्रा में हम
नव रुहानी कर्म पथ गढ़ जायें,
नश्वर जीवन को अमर कर जाएँ|
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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