स्थान -नवापारा खुर्द /सक्ति
जिला -जांजगीर-चांपा /छत्तीसगढ़
विधा --कविता -आलेख
विषय-- बसंत
शीर्षक--- आओ बसंत आओ
आओ बसंत आओ
मेरे गीतों में छाओ ।
सब पर तुम्हारी छाया ।
इसे भी ठौर बनाओ ।
तुम्हें देख अमराई खिलती ।
आमों में है बौर मिलती ।
पीले पीले खेत के सरसों ।
जैसे ही इसे सजाओ ।
पेड़ों में छाती हरियाली ।
फिर आती है कोयल काली ।
छेड़ती जैसे सुंदर तान ।
इस पर भी राग जगाओ ।
फूलों से लद जाते पौधे ।
कहीं डाली भी टूट जाती ।
माली का मन जिससे टूटता ।
हालत ऐसे कर जाओ ।
देख कलियां मुस्काते भौंरे ।
कलियां भी होती हर्षित ।
मेरी कविता राह तकते ।
ऐसा मौसम कर जाओ ।
चांद तुम्हारे कारण बदला ।
सूरज का भी हाल यही ।
नदी ताल तलैया पानी पवन ।
सबका मन भरमाओ ।
उम्मीद तुमसे आशा भी ।
करीब पानी फिर प्यासा भी ।
मन झूलते बागों में ।
ऐसे ही इसे झूलाओ ।
गीत बना है गजल बने ।
भले किसी का नकल बने ।
बनकर रह जग में तने ।
बस इतना तनाओ ।
महकते फूलों सा हो ।
नयन के काजल सा हो
होंठ की लाली सा हो ।
इसका श्रृंगार कराओ ।
पांवों में पायल दे दो ।
हाथों में कंगन ।
काले केश सजे धजे हो ।
इतना आकर्षक बनाओ ।
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