स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता
शीर्षक -"मल्लाह"
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अल्लाह है मल्लाह
इसी के हाथों है
पतवार जीवन का
अब डरना काहे का
थाम के पतवार
उस पार ले जाये
फिर चाहे लहरों की
क्यों ना बाढ़ आये
धर्म के पड़ते पांव
किसी भी नांव
कोई नहीं डूबा सकेे
मिले मल्लाह की छांव
लाख तूफान आए
जीवन की नावँ डगमगाए
रखना भरोसा उस पर
नावँ को पार जरूर लगाए।
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