स्थान --नवापारा खुर्द सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा ---कविता/आलेख
विषय-- रुह
शीर्षक--- रुह की आवाज
रुह की आवाज को, दबाया मत करो ।
सत्य राह चलता , झूठलाया मत करो ।
उसकी एक आवाज निखार,
देता है जीवन ।
एक बार यह अवसर ।
जरुर पाता हर जीवन ।
आया हुआ अवसर को ,गवांया मत करो ।
झूठों की राह चलने से ।
वो सबको है रोकता ।
चलने से पहले हर कोई ।
यह क्यों नहीं सोचता ।
उसकी राह चलो अंगूठा, दिखाया मत करो ।
रुह जानती हर पल की ।
होने वाली घटना ।
जीवन हो या मरण हो ।
इसके साथ ही रहना ।
सपने में भी इससे दूर, जाया मत करो ।
अंगार पर भी रुह को।
चलना आता है ।
हम अमर है अमर ही रहेंगे ।
यह गीत गाता है ।
वो कहे अपनाओ वो कहे छोड़ो , विपरीत जाया मत करो ।
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