Saturday, January 16, 2021

गिरधारी लाल चौहान की रचना- रुह

नाम ---गिरधारी लाल चौहान
स्थान --नवापारा खुर्द सक्ति
जिला ---जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा ---कविता/आलेख
विषय-- रुह
शीर्षक--- रुह की आवाज

रुह की आवाज को, दबाया मत करो ।
सत्य राह चलता , झूठलाया मत करो ।

उसकी एक आवाज निखार,
देता है जीवन ।
एक बार यह अवसर ।
जरुर पाता हर जीवन ।
आया हुआ अवसर  को ,गवांया मत करो ।

झूठों की राह चलने से ।
वो सबको है रोकता ।
चलने से पहले हर कोई ।
यह क्यों नहीं सोचता ।
उसकी राह चलो अंगूठा, दिखाया मत करो ।

रुह जानती  हर पल की ।
होने वाली घटना ।
जीवन हो या मरण हो ।
इसके साथ ही रहना  ।
सपने में भी इससे दूर, जाया मत करो ।

अंगार पर भी रुह को।
चलना आता है ।
हम अमर है अमर ही रहेंगे ।
यह गीत गाता है ।
वो कहे अपनाओ वो कहे छोड़ो , विपरीत जाया मत करो ।

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