स्थान- दुर्ग (छ.ग.)
विधा- कविता
शीर्षक-
*गणतंत्र दिवस पर्व आया है*
अपना देश संपूर्ण स्वराज हुआ था घोषित,
बना था दुनिया का सबसे बड़ा संविधान हमारा,
जन-जन के अधिकारों का तब उल्लेख हुआ,
आज वही छब्बीस जनवरी फिर आया है,
देश के हर कोने में खुशियों भरा माहौल छाया है, कि
आज गणतंत्र दिवस पर्व आया है ।
भारत माता को दुल्हन सा सजा दें,
केसरिया सफेद हरा तीन रंगों की चुनर ओढ़ाकर श्रृंगार कर दें,
राष्ट्र गान से गूँजेगा सारा देश हमारा, कि
आज गणतंत्र दिवस पर्व आया है।
भारतीय सेना का गौरव देखें
टैंक मिसाईल का प्रदर्शन,
घर-घर खुशियों का दीप जलाया जायेगा,
वीर शहीदों के शहादत को मान फिर मिल जायेगा, कि
आज गणतंत्र दिवस पर्व आया है ।
छोड़ो राजनीति, भेदभाव की बातें,
देश विकास की राह पर बढ़ने लगा है,
धर्म मानवता ही सबसे बड़ा, जातियों को भूलाया जायेगा, कि
आज गणतंत्र दिवस पर्व आया है ।
एक नई शुरुआत का दौर है आया,
विश्व में भारत का मान बढता ही जायेगा,
कश्मीर से कन्याकुमारी तक अब अपना तिरंगा लहरायेगा,कि
आज गणतंत्र दिवस पर्व आया है ।।
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